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इस उमà¥à¤° से बैठना सीख जाते हैं बेबी, कहीं आपके बचà¥â€à¤šà¥‡ को तो नहीं हो गई देरी?
जनà¥â€à¤® के बाद हर महीने बचà¥â€à¤šà¥‡ का विकास à¤à¤• दर आगे बढ़ता चला जाता है। वहीं हर महीने के साथ बचà¥â€à¤šà¤¾ à¤à¤• नया सà¥à¤•िल à¤à¥€ सीखता चला जाता है। à¤à¤• खास उमà¥à¤° पर पहà¥à¤‚चने पर बचà¥â€à¤šà¤¾ बैठना और चलना सीख लेता है। इस आरà¥à¤Ÿà¤¿à¤•ल में हम जानेंगे कि शिशॠकिस उमà¥à¤° से बैठना शà¥à¤°à¥‚ करते हैं।
when can baby sit by themselves
इस उमà¥à¤° से बैठना सीख जाते हैं बेबी, कहीं आपके बचà¥â€à¤šà¥‡ को तो नहीं हो गई देरी?
पैरेंटà¥à¤¸ हमेशा यह जानने के लिठउतà¥â€à¤¸à¥à¤• रहते हैं कि उनके बचà¥à¤šà¥‡ (baby) की à¤à¤•à¥à¤Ÿà¤¿à¤µà¤¿à¤Ÿà¥€ और गà¥à¤°à¥‹à¤¥ किस तरह से चल रही है। खासतौर पर à¤à¤¸à¥‡ पैरेंटà¥à¤¸ जिनका पहला बचà¥à¤šà¤¾ है, वो इसे लेकर जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ उतà¥à¤¸à¥à¤• नजर आते हैं। जब बचà¥â€à¤šà¤¾ अपना पहला कदम उठाता है, पहला शबà¥â€à¤¦ बोलता है या पहली बार बैठना सीखता है, तो इन पलों को देखना पैरेंटà¥à¤¸ के लिठबहà¥à¤¤ इमोशनल होता है। बचà¥à¤šà¥‡ अपनी गà¥à¤°à¥‹à¤¥ की तरफ à¤à¤•-à¤à¤• करके कदम बà¥à¤¾à¤¤à¥‡ हैं। कितना अचà¥à¤›à¤¾ लगता है ना जब ननà¥à¤¹à¥€-सी जान खà¥à¤¦ अपना सर उठाना सीख लेती है, करवट बदलती है और घà¥à¤Ÿà¤¨à¥‹à¤‚ के बल चलना सीखती है। पैरेंटà¥à¤¸ खासतौर पर पहली बार पैरेंट बने लोगों को पता होना चाहिठकि बचà¥â€à¤šà¤¾ किस महीने कà¥â€à¤¯à¤¾ नया सà¥à¤•िल सीखता है और उमà¥à¤° के हिसाब से बचà¥â€à¤šà¥‡ की डेवलपमेंट पर नजर à¤à¥€ रखनी चाहिà¤à¥¤ इस आरà¥à¤Ÿà¤¿à¤•ल में हम आपको बता रहे हैं कि शिशॠकिस उमà¥à¤° या महीने से बैठना शà¥à¤°à¥‚ करता है।
कब शà¥à¤°à¥ करते हैं बचà¥à¤šà¥‡ बैठना
यह देखा गया है कि बचà¥à¤šà¥‡ 4 से 7 माह के बीच बैठने लगते हैं। इस उमà¥à¤° में बचà¥à¤šà¥‡ à¤à¤• नई दà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ देखते हैं, कà¥à¤› बिलà¥à¤•à¥à¤² नया सीखते हैं। जब बचà¥à¤šà¤¾ 8 माह का हो जाता है, तब वो बिना किसी सपोरà¥à¤Ÿ के बैठसकता है। लेकिन इस à¤à¤•à¥à¤Ÿà¤¿à¤µà¤¿à¤Ÿà¥€ के दौरान आपको बचà¥à¤šà¥‡ के पीछे सपोरà¥à¤Ÿ लगाना चाहिठकà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि हो सकता है उसका बैलेंस बिगड़ जाठऔर वो गिर जाà¤à¥¤
​पहले मिलते हैं संकेत
4 माह का होते ही बचà¥à¤šà¥‡ का अपने सिर और गरà¥à¤¦à¤¨ पर कंटà¥à¤°à¥‹à¤² आने लगता है। इस समय उनकी गरà¥à¤¦à¤¨ की मसलà¥à¤¸ पूरी तरह से à¤à¤•à¥à¤Ÿà¤¿à¤µà¥‡à¤Ÿ हो जाती हैं। ये अपना à¤à¤¾à¤° संà¤à¤¾à¤²à¤¨à¥‡ के लायक हो जाती हैं। ये वो समय होता है जिस समय बैठना उनके लिठबिलà¥à¤•à¥à¤² नया होता है और वो बैठने की लगातार कोशिश करते हैं।
​इस संकेत को समà¤à¥‡à¤‚
अगर आपका बचà¥à¤šà¤¾ बार-बार अपनी गरà¥à¤¦à¤¨ उठा रहा है, सिर उठा रहा है और ऊपर की तरफ उठने की कोशिश कर रहा है, तो आप समठजाà¤à¤‚ कि वह बैठना चाहता है।
​बचà¥à¤šà¥‡ बैठते समय बैलेंस बनाना कैसे सीखते हैं?
जैसे ही आपका बचà¥à¤šà¤¾ गरà¥à¤¦à¤¨ उठाने लगे, सिर उठाने लगे, तो समठलें कि अब वह बैठने के लिठपूरी तरह से तैयार है। लेकिन बैलेंस बनाने में आपको पहले उनकी थोड़ी मदद करनी पड़ेगी। अपने दोनों हाथ से उनके दोनों हाथ पकड़ कर उनको ऊपर की तरफ उठने के लिठपà¥à¤°à¥‹à¤¤à¥à¤¸à¤¾à¤¹à¤¿à¤¤ करें। कà¥à¤› अटà¥à¤°à¥ˆà¤•à¥à¤Ÿà¤¿à¤µ आवाज निकाल कर आप उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ ऊपर उठने के लिठबà¥à¤²à¤¾ सकते है। बैलेंस बनाने में मदद करने के लिठपिलो और सॉफà¥à¤Ÿ टॉय की मदद ली जा सकती है।
​किन बातों का धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ रखना है जरूरी
शà¥à¤°à¥à¤†à¤¤ से ही बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ की हर तरह की गà¥à¤°à¥‹à¤¥ के लिठकà¥à¤› खास बातों का धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ रखना बहà¥à¤¤ जरूरी है। जैसे छोटे बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ को जब à¤à¥€ पकड़ें, उनकी गरà¥à¤¦à¤¨ बिलà¥à¤•à¥à¤² सीधी रखें, इससे उनकी गरà¥à¤¦à¤¨ की गà¥à¤°à¥‹à¤¥ अचà¥à¤›à¥€ होती है और वो जलà¥à¤¦à¥€ हर तरह की à¤à¤•à¥à¤Ÿà¤¿à¤µà¤¿à¤Ÿà¥€ सीख पाते हैं। हमेशा सबसे पहले उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ अपनी गोद में बैठाà¤à¤‚। इससे बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ को बैठने की आदत लगती है। बैक में मसाज देना बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ के लिठबहà¥à¤¤ जरूरी होता है, इससे उनकी मसलà¥à¤¸ के विकास को बढ़ावा मिलता है।
​टमी टाइम और टमी का रखें खà¥à¤¯à¤¾à¤²
गà¥à¤°à¥‹à¤¥ का सीधा कनेकà¥à¤¶à¤¨ खाने पीने से होता है। बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ के खाने पीने का खà¥à¤¯à¤¾à¤² रखें, उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ सही टाइम पर पौषà¥à¤Ÿà¤¿à¤• फूड दें। साथ ही खाना खाने के बाद सà¥à¤²à¤¾à¤¨à¥‡ के बजाय उनके साथ खेलें। जितना जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ वो à¤à¤•à¥à¤Ÿà¤¿à¤µ रहेंगे, उनका डाइजेसà¥à¤Ÿà¤¿à¤µ सिसà¥à¤Ÿà¤® उतना ही बेहतर रहेगा और पेट के दà¥à¤°à¥à¤¸à¥â€à¤¤ रहने पर बचà¥à¤šà¥‡ नà¤-नठसà¥à¤•िलà¥à¤¸ जलà¥à¤¦à¥€ सीख पाते हैं।
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